Tuesday, 6 October 2020

قیادت ، میڈیا اور مسلمان ,مفتی محمد ثناء الہدیٰ قاسمی

    قیادت ، میڈیا اور مسلمان ,مفتی محمد ثناء الہدیٰ قاسمی

 اس وقت قیادت کو مثبت خطوط پر سر گرم عمل ہونے ، میڈیا اور ذرائع ابلاغ کو صحافت کے دائرے سے باہر نکلنے اور مسلمانوں کو اپنے قائدکے حکم پر آنکھ بند کرکے سمعنا واطعنا کہنے کی ضرورت ہے، اللہ کا کرم ہے کہ اس نے امارت شرعیہ کے امیر شریعت مفکر اسلام مولانا محمد ولی رحمانی کی صورت میں مضبوط قائد ہمیں دیا ہے، جن کے پاس کام کا طویل تجربہ بھی ہے، اور جو سرد وگرم چشیدہ بھی ہیں، ملی مسائل کو حل کرنے کی صلاحیت ، سیاسی حضرات سے آنکھ میں آنکھ ڈال کر بات کرنے کا فن، انہیں پورے طور پر آتا ہے، ان کے اندر عظمت کردار بھی ہے جرأت گفتار بھی ، سنگلاح اور پریشان راستے ان کے عزم کو مہمیز کرتے ہیں، وہ ان کے راستے کی رکاوٹ نہیں بنا کرتے، اللہ رب العزت نے ا نہیں نگہ بلند ، سخن دل نواز اور جاں پرسوز کی قائدانہ صفات کے ساتھ نرم دم گفتگو ، گرم دم جستجو کے مؤمنانہ اوصاف سے بھی مالامال کیا ہے، ایسے قائد کی امارت میں امارت شرعیہ کا کارواں آگے بڑھ رہا ہے اور وہ  جنرل سکریٹری آل انڈیا مسلم پرسنل لا بورڈ کی حیثیت سے بھی’’ دین اور دستور بچاؤ مہم ‘‘کو آگے بڑھانے میں لگے ہوئے ہیں، ان کی نگاہیںنبض حالات پر ہیں اور نباضی کا فن انہوں نے اپنے بڑوں کے ساتھ کام کرکے سیکھا ہے، اس طرح دیکھیں تو قیادت زر خیز ہے، با رآور ہے اور کارواں کو منزل تک پہونچا نے کے جذبے اور لگن سے سرشار ہے۔

ضرورت اس بات کی ہے کہ ذرائع ابلاغ، الیکٹرونک میڈیا ، پرنٹ میڈیا اور سوشل سائٹس قائد کی جد وجہد کو ، ان کے منصوبوں کو، کام کی حکمت عملی کو ، ان کے احکام وہدایات کو عام مسلمانوں تک پہونچائے ، وہ غیر جانب دار نہیں، حق کا طرف دار بن کر سامنے آئے، صحافت جو جمہوریت کا بڑا ستون ہے اس کی ذمہ داری صرف یہی نہیں ہے کہ وہ خبروں کو چھاپ دے، اس کی ذمہ داری ہے کہ جو صالح اقدار ہیں، ملک کے دستورکا جو تقاضہ ہے دین وشریعت جس کا مطالبہ کرتا ہے اس کو بغیر کسی خوف کے سماج کے سامنے لائے، عوام کو بیدارکرے ، انسانوں کو اس کی ذمہ داری یاد دلائے، مذہب کی بنیاد پر نہ سہی ، انسانی بنیادوں پر ہی وہ اچھا سماج بنانے کی سعی میں ہاتھ بٹائے، معاشرہ کو صالح رخ پر ڈالنے کا کام انجام دے ، میڈیا کو زرد صحافت اور بکاؤ صحافت سے باہر نکل کر اپنے اس فرض کی ادائیگی کے لیے کمرہ بستہ رہنا چاہیے، ایک عاشق نے اپنی محبوبہ کی نازک خرامی اور رقیبوں کی بڑی تعداد کو دیکھ کر کہا تھا کہ ’’ زیر قدمت ہزا ر جان است‘‘ آج جو میڈیا کی اہمیت ہے، ذرائع ابلاغ کے جو اثرات ہیں، سوشل سائٹس کا جو بڑھتا ہوا دائرہ کار ہے، اس کی روشنی میں ’’قدمت‘‘ کے ’’دال‘‘ کو ’’لام‘‘ سے بدل دیجئے اور صحافیوں کو بتا دیجئے کہ ’’زیر قلمت ہزار جان است‘‘ تمہارے قلم کے نیچے ہزاروں جان کا مسئلہ ہے، تم نے بھڑکاؤ مضامین اور رذائل کو پھیلانے والے آرٹیکل تبصرے شائع کیے تو ہزاروں کی جان جائے گی، اس لیے قلم کو محتاط رکھیے اور اس کا استعمال اللہ کی امانت سمجھ کر کیجئے۔

قیادت نے اپنی ذمہ داری ادا کردی ، میڈیا اور ذرائع ابلاغ نے قیادت کے منصوبوں کو عام لوگوں تک اور مسلمانوں تک پہونچا دیا ، اب مسلمان سن کر حرکت میں نہ آئے، اس کے اندر عمل کا جذبہ نہ پیدا ہو ، وہ سمع وطاعت سے گریز اں رہے، مختلف خیموں میںبٹ کر اپنے تحفظات کی فکر میں لگا رہے، وہ بنی اسرائیل کی طرح ’’ فَاذْھَبْ اَنْتَ وَرَبُّکَ فَقَاتِلا‘‘ کہہ کر اپنی جان چھڑا لے تو قیادت کا کیا قصور ہے۔آج  مسلم سماج کا سب سے بڑ ا مسئلہ یہی ہے کہ اس کے اندر سمع وطاعت کی کمی ہے ، فقدان قیادت کا نہیں، قائد کی ہدایت پر عمل کرنے اور ساتھ چلنے کا ہے۔

ہمیں یہ بات اچھی طرح سمجھ لینی چاہیے کہ قیادت کی روح کو رواں ہونے کے لیے جسم کے سمع وطاعت کی ضرورت ہے ،قیادت کا ساتھ نہ دینے والا سماج بے روح کے جسم کی طرح ہے، جسے قبرستان پہونچانے میں جلدی کیا جاتا ہے۔

Monday, 5 October 2020

मोदी सरकार के नए कानून से कर्मचारियों पर बरसेगा कहर अब स्थाई से होंगे अस्थाई (कॉन्ट्रैक्ट)

 मोदी सरकार के नए कानून से कर्मचारियों पर बरसेगा कहर अब स्थाई से होंगे अस्थाई (कॉन्ट्रैक्ट)



आए दिन मोदी सरकार द्वारा कभी कर्मचारियों पर तो कभी किसानों पर तो कभी जात पात के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है कोरोना महामारी के दौरान करोड़ों लोग अपनी नौकरी के गवा चुके हैं उसी दौरान लोगों को नौकरी की जरूरत है तो मोदी सरकार एक के बाद एक नौकरियों को खत्म कर रही है तो वही मोदी सरकार के नए कानून से कंपनियों में काम कर रहे श्रमिकों को जो कि स्थाई रूप से कार्य कर रहे थे उनको अस्थाई करने के लिए कानून बनाया है जेके हास्यास्पद है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के फैसलों से किसानों के बाद नौकरीपेशा लोगों के रोजगार की सुरक्षा पर भी सवाल उठ खड़ा हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा हाल में मंजूर किए गए इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020 के तहत कंपनियां स्थायी नौकरियों को फिक्स्ड कांट्रेक्ट टर्म में तब्दील कर सकती हैं।

मोदी सरकार ने पिछले सप्ताह इस कानून की अधिसूचना जारी की है जिससे कंपनियों को कर्मचारियों की जिम्मेवारी को लेकर बड़ी राहत मिली है, लेकिन कर्मियों की नौकरियां असुरक्षित हो गई हैं।

अब कंपनियां फिक्स्ड टर्म कांट्रेक्ट जाॅब के लिए सीधे तौर पर कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। अब तक कंपनियों को इसके लिए कांट्रेक्टर्स का सहारा लेना पड़ता था।

अब डायरेक्ट कंपनियां द्वारा ऐसी भर्तियां करने से कंपनियों के खर्च में कमी आएगी।

नए नियम के अनुसार, फिक्स्ड टर्म कांट्रेक्ट कर्मियों को स्थायी कर्मियों की तरह सभी सुविधाएं मिलेंगी, हालांकि कंपनियां उन्हें कभी नौकरी से बाहर कर सकती हैं और ऐसा करने पर उन्हें स्थायी कर्मचारियों की तरह सुविधाएं या मुआवजा नहीं मिलेगी।

इससे कंपनियां जाॅब सिक्यूरिटी की जिम्मेवारी से तो मुक्त रहेंगी ही साथ ही उनका वित्तीय फायदा भी होगा।

यह कानून सरकार की ओर से मार्च 2018 में लागू किए गए कानून से अलग है। उस कानून में कहा गया था कि कोई भी कंपनी स्थायी कर्मचारियों के पदों को फिक्स्ड टर्म एंप्लायमेंट में तब्दील नहीं कर सकती है। नए कानून में ऐसा कोई नियम नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में बाजार में निजी सेक्टर में स्थायी नौकरियों की कमी देखने को मिलेगी। सरकार ने कांट्रेक्ट की सीमा नहीं रखी है और न ही यह उल्लेख है कि उसे कितनी बार रिन्यू किया जा सकता है।

फिक्स्ड टर्म एंपलायमेंट की शुरुआत यूरोप में 2000 में हुई थी, लेकिन वहां इसे स्थायी नौकरी की ओर एक कदम माना गया था, यहां स्थिति इससे विपरीत है। अब ऐसे कर्मचारी स्थायीकरण की ओर नहीं बढ सकेंगे। एक सर्वे के अनुसार, भारत में 4.2 प्रतिशत कर्मचारी ऐसे हैं जो सम्मानजनक नौकरी की स्थिति में हैं।



विश्व शिक्षक दिवस को अधिकार दिवस के रूप में मनाया गया । जिला प्राथमिक शिक्षक संघ बेतिया, नागेंद्र नाथ शर्मा

    विश्व शिक्षक दिवस को अधिकार दिवस के रूप में मनाया गया । जिला प्राथमिक शिक्षक संघ बेतिया, नागेंद्र नाथ शर्मा


बिहार पश्चिम चंपारण बेतिया  न्यूज डेस्क ,अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के निदेश एवं बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर आज दिनांक आज दिनांक 05-10-2020 को विश्व शिक्षक दिवस को अधिकार दिवस के रूप में मनाया गया । जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के डॉ शोभाकांत झा स्मृति भवन में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों व कार्यसमिति सदस्यों की एक बैठक जिलाध्यक्ष गौतम प्रसाद राव की अध्यक्षता में आयोजित हुई , जिसे संबोधित करते हुए बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव सह प्रधान सचिव , जिला प्राथमिक शिक्षक संघ नागेन्द्र नाथ शर्मा ने कहा कि आज विश्व शिक्षक दिवस को हम अधिकार दिवस के रूप में मना रहे हैं । इस पुनीत अवसर पर आज हम शिक्षा के प्रति अपने दायित्वों का सतत निर्वहन करते रहने का संकल्प करते हैं । साथ ही , अपने अधिकारों की रक्षा हेतु सदैव संघर्षरत रहने का संकल्प भी लेते हैं । हमारी माँगें नयी नहीं हैं । हम पुरानी पेंशन योजना , पुराने  शिक्षकों की भाँति सेवाशर्त , राज्यकर्मी का दर्जा , स्थानांतरण , प्रोन्नति , पुराने वेतनमान पर ही  अनुकम्पा पर नियुक्ति आदि माँगों की स्वीकृति तक संघर्षरत रहेंगे । गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को धरातल पर कार्यान्वित करने का लक्ष्य शिक्षकों के वेतन और सुविधाओं की असमानता को दूर किये बिना प्राप्त नहीं किया जा  सकता है ।इस असमानता को मिटाने की पहल सरकार को करनी होगी ।हम इन माँगों की पूर्ति के लिए पहले भी संघर्षरत रहे हैं और आगे भी रहेंगे । अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ भी  हमारी माँगों के समर्थन में आंदोलनरत है ।   


      बैठक को बेचू प्रसाद यादव , चन्द्रमणि मिश्र , मोजीबुल हक , मोहन प्रसाद श्रीवास्तव , रामेश्वर राम , नर्वोदय ठाकुर,आशुतोष सिंह,राम एक बाल दुबे,जीतेंद्र कुमार , विजय किशोर,दिलीप श्रीवास्तव,मनोज यादव, , मुन्ना ठाकुर , राजू सिंह ,अमुल्य प्रताप,मो इशकुल्लाह, सिद्धार्थ तिवारी आदि ने संबोधित किया ।

कर्मचारी अपने भविष्य निधि से एडवांस रकम निकाल सकते हैं

 कर्मचारी अपने भविष्य निधि से एडवांस रकम निकाल सकते हैं


नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी के ठीक बाद केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (EPF - Employee Provident Fund) से एडवांस ​रकम निकालने की अनुमति दी थी. लेकिन फिलहाल इसको प्रकार ने बंद कर दिया है और दूसरे तरीके से पैसे निकाले जा सकते हैं जो कि निम्न है

कर्मचारी भविष्य निधि से पैसा निकालने के निम्न तरीके हैं
1. कर्मचारी भविष्य निधि से पैसे निकालने के लिए सबसे पहले आपको EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर लॉगिन करना होगा. आप अपने UAN और पासवर्ड की मदद से इसे लॉगिन कर सकते हैं. याद रहे कि आपका पीएफ अकाउंट आधार से लिंक होना चाहिए.
2. इस पोर्टल पर लॉगिन के बाद Online Service पर क्लिक करें और Claim (Form-31, 19 & 10C) को चुनें.
3. अगले स्टेप में आपको बैंक अकाउंट नंबर डालकर Verify पर क्लिक करना होगा. इसके बाद फिर Yes पर क्लिक करना होगा. अब Proceed For Online Claim पर जाएं.
4. फंड ऑनलाइन निकालने के लिए PF Advance (Form 31) चुनें. अब यहां आपको बताना होगा कि यह रकम क्यों निकाल रहे हैं. कारण बताने और कर्मचारी पता भरने के बाद आवेदन करें.
44 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का विड्रॉल
EPFO द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च के अंतिम सप्ताह से कर्मचा​री भविष्य निधि से 38,71,664 लोगों ने 44,054.72 करोड़ रुपये निकाले हैं. श्रम मंत्री संतोष गंगवार (Santosh Gangwar) ने बताया है कि इन विड्रॉल में कोविड-19 से संबंधित क्लेम भी शामिल है.
महाराष्ट्र से ही 25 मार्च से लेकर 31 अगस्त के बाद 7,23,986 कर्मचारियों ने करीब 8,968.45 करोड़ रुपये विड्रॉ किया है.
अब 1 सितंबर के बाद से पीएफ अकाउंट (PF Account) से एडवांस ​रकम निकालने के लिए सरकार की छूट खत्म हो चुकी है. ऐसे में इस स्कीम के तहत आप पीएफ अकाउंट से पैसे नहीं निकाल सकते हैं. लेकिन, कर्मचारियों के पास अभी भी अपने पीएफ अकाउंट से पैसे निकालने का विकल्प है. हालांकि यह सरकार द्वारा एडवांस विड्रॉल स्कीम की छूट के तहत नहीं होगा.

Sunday, 4 October 2020

          بھوپال کا عالمی اجتماع موخر 


بھوپال : عالمی تبلیغی اجتماع جو ہر سال بھوپال میں گزشتہ 73 سال سے منعقد ہورہا تھا کووڈ۔19 وباء کے باعث پہلی مرتبہ اس سال ملتوی کردیا گیا ہے ۔ 73 واں تبلیغی اجتماع 27 تا 30 نومبر کو منعقد ہونے والا تھا ۔ دنیا بھر سے 12 تا 24 لاکھ مسلمان اس اجتماع میں ہر سال شرکت کرتے ہیں ۔ اجتماع کمیٹی کے عتیق الاسلام نے کہا کہ کووڈ۔19 کی وجہ سے اس سال اجتماع منعقد نہیں ہوگا ۔

NDA में जबरदस्त फूट, नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नही लडेगी LJP

     NDA में जबरदस्त फूट, नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नही लडेगी LJP 




पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले NDA में फूट देखने को मिल रही है। एलजेपी ने नीतिश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। एलजेपी को नीतिश कुमार का बतौर सीएम चेहरा मंजूर नही है। LJP की संसदीय बोर्ड की बैठक में आज यह फैसला लिया गया है। लोक जनशक्ति पार्टी LJP) वैचारिक मतभेदों के कारण जनता दल यूनाइटेड) के साथ गठबंधन में आगामी बिहार चुनाव नहीं लड़ेगी। एलजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल खालिक ने इसकी जानकारी दी। अब्दुल खालिक ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर और लोकसभा चुनावों में, लोक जनशक्ति पार्टी LJP) ने भारतीय जनता पार्टी BJP) के साथ एक मजबूत गठबंधन साझा किया है।

Saturday, 3 October 2020

اسلام فوبیا : فرضی خوف میں مبتلا مغربی دنیا

      اسلام فوبیا : فرضی خوف میں مبتلا مغربی دنیا!



مفتی محمد ثناء الہدیٰ قاسمی نائب ناظم امارت شرعیہ پھلواری شریف پٹنہ

چودہویں صدی ہجری میں عالم اسلام نے مغربی دنیا سے شدیدعلمی وفکری مزاحمت کے بعد جو بر تری ثابت کی اور جس کے نتیجے میںبہت سے علاقوں میںاسلام نے پھر سے اپنے قدم جمائے ،وہاں اسلامی تہذیب وثقافت ، اسلامی اقدار اور زندگی کے ہر شعبہ میںاسلام کی واضح اور عمد ہ تعلیمات نے لوگوں کو متاثر کرناشروع کیا ، عیسائیت کی سمٹتی طنابیں اور یہودیت کی مادیت سے قربت اور مذہب سے دوری کی وجہ سے اسلام لوگوںکے دلوں میںگھر کرنے لگا ، جس سے مغربی استعمار کو خطرہ لاحق ہوا ،اور ایسا انہیں محسوس ہونے لگا کہ اسلام دنیا کی بڑی طاقت کے طور پر ابھر رہا ہے ۔ اس احساس نے انکے اندر اسلام سے خوف پیدا کردیا اور وہ اسے ہوّا بنا کر فوبیا کے شکار ہو گئے، فوبیا نارمل حالت کو نہیں کہتے، یہ Abnormel fear ہوتا ہے ، یہ لفظ انگریزی سے منتقل ہو کرا ن دنوں عربی میں بھی اسی معنی میںاستعمال ہو رہا ہے۔ چنانچہ عربی میں اس کے معنی’’ ھلع مرض من شی معین ‘‘ مریضانہ انداز میںکسی معین چیز کا ہوّا کھڑا کر دیناکے ہیں ، یہ ہوّا  اُدباء، شعراء، مفکرین، میڈیا، دانشور ، سیاست داں وحکمراںسبھی طبقہ کی طرف سے کھڑا کیا گیا  اور ایسا ماحول بنا یا گیا کہ سبھی تہذیب وثقافت اور سبھی آئیڈیا لوجی کے لوگ اسلام سے خطرہ محسوس کرنے لگے ، اس خطرہ کے پیش نظر انہوںنے ایسی پالیسیاںبنائیں اور ایسے اقدام کئے جس نے اسلام اور مسلمانوں کے خلاف انکے دلوں میں نفرت کی آگ بھر دی ،مستشرقین یورپ نے غلط پروپگنڈہ کرکے نفرت کی اس آگ کوخوب خوب ہوا دیا ، اور شکوک وشبہات اور غلط فہمیوں کے پھیلا نے کا کام منصوبہ بند انداز میں کیاگیا ،جس کی وجہ سے غیر مسلم دنیا یقین کرنے لگی کہ اسلام، تشدد ، زبردستی ، بے لوچ کٹر پن، تعصب اور تنگ نظری کا مذہب ہے ۔انہوں نے اپنے منصوبہ کی بنیاد جن اصول ودفعات پر رکھی ،ا س میں ایک اصول یہ طے کیا کہ اسلامی معاشرہ سے ایسے طریقے سے نفرت دلائی جائے ، جس سے ہماری دشمنی طشت ازبام نہ ہو اور ہم دینی وروحانی اقدار میں عیوب ونقائص نکال کر اسے تہہ وبالا کرنے میں کامیاب ہو جائیں ( دیکھئے کلمۃ الحق ماہ محرم 1387ھ مطابق اپریل 1964)

اس مہم میں بڑا حصہ یہودیوں کا رہا ، یہودیوں کی انٹر نیشنل کانفرنس منعقدہ 1900 نے قرارداد پاس کیا کہ ’’ ہم صرف اس پر اکتفا نہیں کریں گے کہ دین داروں پر فتح حاصل کریں ، انکی عبادت گاہوں پر غلبہ حاصل کرلیں؛ بلکہ ہمارا بنیادی اور اصل مقصد ان لوگوں کے وجود کو ختم کرنا ہے۔ ماسونی مجلۂ کاسیا 1903 میں اس بات کا اعلان کیا گیا کہ ہمیں دین کو حکومت سے جدا کرنا ہے، اور ایسی جد وجہد کرنی ہے کہ ماسونیت دین کی جگہ لے لے اور اس کی محفلیں عبادت گاہوں کی جگہ لے لیں ، ماسونی مشرق اعظم نے 1913میں انسانوں کو مقصود بنانے اور خدا کو چھوڑ نے کی تجاویز پاس کیں اور بلغراد کی ماسونی کانفرنس1922 نے اس بات کا اعلان کیا کہ ہمیں ہر گز نہیں بھولنا چاہئے کہ ہم ماسونی، دین کے دشمن ہیں اورہمیں دین کے آثار اور علامات کے خاتمہ کی کوشش میں کوتاہی نہیں کرنی چاہے ۔عیسائی دنیا نے بھی اس جد وجہد میں حصہ لیا اور ساری توجہ مسلمانوں سے اسلامی فکر کے خاتمہ اور خدا سے ان کے تعلق کو منقطع کرنے پر صرف کر دیا ، ان کی جد وجہد کا مرکزی محور مسلمانوں کی وحدت کو ختم کرنا، پارہ پارہ کرنا رہا ؛تا کہ مسلمان کمزور ذلیل اور بے سہارا ہو جائیں ۔ ان کے یہ منصوبے وقتاً فوقتاً کامیاب ہوتے رہے ، خلافت اسلامیہ کا خاتمہ ، ترکی کے دستور سے اسلامی اساس کو نکال باہر کرنا ، عراق وافغانستان میں مسلمانوں کی قوت وطاقت کا زوال اورعراق کے مسلمانوں کوٹکڑے ٹکرے کرنا، اسی منصوبے کے نتائج ہیں، جس سے اسلام اور مسلمانوں کو ناقابل تلافی نقصانات کا سامنا کرنا پڑا۔ جولوگ کچھ اور نہیں کر سکے وہ تنگ نظری کے سبب ، سبّ وشتم پر اتر آئے ، نبی صلی اللہ علیہ وسلم کی شان میںگستاخی، چاہے وہ مضامین ومقالات کی شکل میںہو ،یا کارٹونوں کی شکل میں، اس کی تہہ میںیہی جذبہ کار فر ماہے ،اس کی بھی کوشش کی گئی کہ مسلمانوں کو ان کے مذہبی فرائض سے روکا جائے اور ثقافتی تقریبات منعقد نہ ہو سکیں ، بعض نام کے مسلم لوگوں سے ایسے کام کروائے گئے جس سے اسلام کے طور طریقوں اور عبادات کا مذاق اڑایا جاسکے ، میڈیا نے بڑے پیمانے پر اس کی تشہیر کی ، جیسے سب کچھ بدل رہا ہے ۔ اس طرح اسلام فوبیا کا دائرہ وسیع سے وسیع تر ہو تا چلا گیا ، بنیادی حقوق کی ساری دفعات کتابوں میںبند ہو کر رہ گئیں ۔ اور ان کے خلاف اظہار رائے کی آزادی کا ہتھیار استعمال کیا گیا ،اور ان لوگوں نے کیا ، جنہوں نے دوسروں سے آزادی کے حقوق چھینے اور سلب کئے، اس صورت حال سے مسلمانوں کو ذہنی اور کبھی کبھی جسمانی اذیتیںبھی اٹھا نی پڑیں ، اس کا ایک نقصان یہ بھی ہوا کہ مسلمانوں ہی میںسے کچھ لوگ مغرب کے سامنے سپر انداز ہوگئے اور انہوںنے مغربی تہذیب وثقافت کو اپنا نے میں خیر وشر کی تمیز کے بغیر تیزی دکھا ئی اور اسلامی تہذیب وثقافت کو عقیدہ ،عبادات اور پرسنل لا تک محدود کرکے رکھ دیا ، تدریجا ان شعبوں میںبھی انہوں نے اسلام سے کنارہ کشی اختیار کرلی اور پورے طور پر مغرب کے ہم نوا ہو گئے ، اس طرح اسلام فوبیا کا دائرہ مسلمانوں تک پہونچ گیا۔ اور وہ بھی مغرب کے غلط پروپیگنڈے کے شکار ہو گئے ، یہ دائرہ دھیرے دھیرے بڑھتا جا رہا ہے۔ 

لیکن اس کا ایک بڑا فائدہ یہ ہوا کہ دوسرے مذاہب کے لوگوں نے اسلام کو جاننا اور پڑھنا شروع کیا ، ان میںاس مذہب کے تئیں ایک قسم کا تجسس پیدا ہو گیا ، اور اسلام کی صداقت نے ان کے دلوں میں گھر کر لیا ، یہی وجہ ہے کہ آج بڑی تیزی سے دوسرے مذاہب کے لوگ اسلام میںداخل ہو رہے ہیں ۔

واقعہ یہ ہے کہ اسلام فوبیا کے ازالہ کی شکل صرف یہ ہے کہ ہم اسلام کی واضح اور صحیح تعلیمات کو لوگوں میں پھیلا ئیں، مغرب میں جن کتابوں سے اسلام کو سمجھنے اور سمجھانے کے لئے استعمال کیا جاتا ہے ۔ وہ بیش تر مستشرقین کی لکھی ہوئی ہیں اور وہ قاری کو گمراہ کرتی ہیں، ضرورت ہے کہ مغرب اور یورپ کی مروجہ زبانوںمیںوہاں کے معیارومزاج کو سامنے رکھ کر اسلام کی بنیادی تعلیمات ، نبی رحمت کی رحمت ومحبت سے پُر احکام وہدایات کے مختلف پہلوؤں پر کتابیں لکھی جائیں اوران سے مغرب کو روشناس کرایا جائے ۔ ایسا نہیں ہے کہ یہ کام نہیں کیا جا رہا ہے، مقصد صرف یہ ہے کہ جس بڑے پیمانے پر ہونا چاہئے، نہیں ہو رہا ہے۔ اس کے لئے احمد دیدات جیسے مین ٹومشن کی ضرورت ہے ، اس کے بغیر اسلام فوبیا کا ازالہ ممکن نہیںمعلوم ہوتا ۔اب تک جس نہج پر ہم نے کام کیا ہے اس کی بنیاد بیش تر موعظۂ حسنہ، وجادلھم بالتی احسن پر ہے ، دعوت دین کاکام حکمت کے ساتھ ہم نے کم کیا ہے ؛ حالانکہ دعوت دین کے کاموں میں اس کو اولیت حاصل ہے ۔جس کاپتہ حکم خدا وندی  اُدْعُ اِلیٰ سَبِیْلِ رَبِّک بِالْحِکْمَۃِ وَالْمَوْعِظَۃِ الْحَسَنَۃِ وَجَادِلْھُمْ بِالَّتِیْ ھِیَ اَحْسَنْ سے چلتاہے اور جس میں دعوت الحکمۃ کو مقدم رکھا گیا ہے۔یہاں مجھے ا س حقیقت کا بھی اعتراف کرنا چاہئے کہ خود ہمارے بہت سارے عمل ’’اسلام فوبیا ‘‘کا سبب بن جاتے ہیں، تلواروں سے ٹپکتے خون کے اشتہارات ، بابری مسجد کی تصویر کے ساتھ ، الہی بھیج دے محمود کوئی کااشتہار ، اور انتہا ئی پر امن کارواں میں تلوار کو تحفے میں پیش کرنے،جیسا عمل دیکھنے میں جتنا بھلا معلوم ہو، دوسرے مذاہب والے اسے دہشت اور تشدد کا اشاریہ سمجھتے ہیں، اور خود مسلم سماج کو ایسے اشتہارات سے کوئی فائدہ نہیںپہونچتا ، اس قسم کی حرکتوں سے دوسرے مذاہب والے اسلام فوبیا کے شکار ہوجاتے ہیں۔ہماری بے عملی اور بد اعمالی سے بھی اسلام فوبیا کا پیغام دوسروں تک پہونچا ہے، اس لئے ہمیں اپنے اعمال کا بھی محاسبہ کر نا چاہئے ،کہ کہیںہم دانستہ یا نا دانستہ ، اسلام کونقصان تو نہیں پہونچا رہے ہیں ۔ اسلام فوبیا کے ازالہ کے لئے کرنے کا ایک کام یہ بھی ہے، اسلام کے محاسن کے اظہار کے ساتھ ساتھ اسلام دشمنوں کی جانب سے مخالفانہ فکری یلغارکا علمی جواب دیاجائے، اس سے اسلامی تہذیب وثقافت پر مسلمانوںکا اعتماد بحال ہوگا ، اور اسلام مخالف اعتراضات کا دفاع کیا جا سکے گا۔اگرہم ان امور پر توجہ دے سکے اور لوگوں کو صحیح اسلامی تعلیمات سے روشناش کرا سکے ، تو اگلی صدی انشائ اللہ اسلام کی صدی ہوگی۔

سالار اردو جناب غلام سرور کی یوم ولادت بہار اسٹیٹ اردو ٹیچر س ایسوسی ایشن کیطرف سے تقریب یوم اردو منانا کا اعلان

  سالار اردو جناب غلام سرور کی یوم ولادت بہار اسٹیٹ اردو ٹیچر س ایسوسی ایشن کیطرف سے تقریب یوم اردو منانا کا اعلان   10جنوری کو منائی جائےگی...